tag:blogger.com,1999:blog-69329557224335216082008-05-22T11:02:26.889+05:30बस्तर समाचारकमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comBlogger8125tag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-9644420311167102192008-05-05T06:55:00.003+05:302008-05-05T08:57:26.513+05:30लाख से ज्यादा पेङ अगले दो महिने में काटे जायेंगे: कौन रोकेगा विनाश?बस्तर में इन दिनो किसी न किसी बहाने जंगल सफाया करने का काम धङल्ले से जारी है,कंही वैध(?)तो कंही अवैध नक्सली प्रभावित क्षेत्र के बहाने जंहा वनविभाग ने अपनी आंखें बंद कर रखी है वंही इसका फायदा उठाने में लकङी तस्करों ने कोई कसर नही छोङा है वनविभाग के अधिकारी व कर्मचारी की मिली-भगत के कई मामले भी सामने आए है हाल में ही कांकेर के नरहरपुर मे एक रेंजर को गांव वालों द्वारा पकङकर पुलिस को सौंपा गया था <br />कंही-कंही जंहा नक्सली प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से जंगल कटने से बचा हुआ है तो सङक किनारे के लाखों पेङ नक्सलियों ने ही काटकर सङक में बिछा दिये कथित जनयुद्ध(?) के इन सिपाहियों ने यह दुष्कृत्य पुलिस के साथ मोर्चाबन्दी करते हुये अथवा प्रायः हर महिने बस्तर बंद के आव्हान के दौरान किया पिछले तीन वर्षों में वन कटाई के आंकङों में बहुत बङा योगदान कथित शांति सिपाही(?) सलवा-जूङूम कार्यकर्ताओं का भी है,जिन्होने नये खेत और घर बनाने के नामपर नक्सलियों से मोर्चाबंदी लेते हुये निर्ममता पूर्वक अपने धारदार हथियार पेङो पर चलाये दक्षिण बस्तर के सघन वनो में सलवा - जूङूम कार्यकर्ताओं द्वारा गाजर मूली की तरह पेङ काटे जाने खबरें छपती रही है नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा लेते हुये पुलिस के उपर भी पेङों की कटाई व तस्करों से मिली-भगत का आरोप लगते रहा है तीन वर्ष पूर्व कांकेर से लगे राष्टीय राजमार्ग के किनारे तीन पहाङ सहित हजार एकङ के लग-भग जंगल पुलिस प्रशिक्षण के नाम पर 'जंगल वार' वालों ने हथिया लिये <br />विकास(?) के नाम पर बनाये गये सरकारी योजनाओं,बांध निर्माण,सङक निर्माण तथा भवन निर्माण आदि निरंतर चलने वाली योजनाओं में हरे-भरे बृक्षों की बलि दी जाती रही है अकेले कोसारटेडा सिंचाई परियोजना में ही अगले दो महिने में 42हजार बृक्षों की कटाई किये जाने का घोषित सरकारी कार्यक्रम है यह परियोजना बस्तर के कोंडागांव क्षेत्र में बनना है, जिसके डूबान क्षेत्र में आ रहे 42हजार बृक्षों में साल,सागौन,आम,साजा के अलावा दूर्लभ प्रजातियों सैकङो वर्ष पुराने पेङ शामिल है इनमे छोटे बृक्षों की गिनती शामिल नही है इस परियोजना के क्रियान्वयन मे वन विभाग भी उत्साह के साथ भिङ गया है पेङों की कटाई के लिये पावर चेन्स की ब्यवस्था वन विभाग ने कर लिया है, जिससे मिनटों मे विशाल बृक्ष को जमीन मे सुलाया जा सकता है इसके लिये वन विभाग को 46करोङ रुपये की राशि भी सिंचाई विभाग द्वारा दिया जा चुका हैवनसंरक्षक के अनुसार दस बिजली चलित आरियों से इन बृक्षों को बरसात से पहले काटा जायेगा <br /><br />इसके अलावा कोंडागांव से राजनांदगांव रोड चौङीकरण के नाम पर लग-भग पांच हजार बृक्ष काटे जाने है वन विभाग के एक बङे अधिकारी के अनुसार शासकीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन के नाम पर अगले दो महिने में वैध(?) तरीके से एक लाख से ज्यादा पेङ काटे जाने है कंहा है पर्यावरणप्रेमी ?कौन रोकेगा इस विनाश लीला को ! न्यायालय भी इन दिनो इस विनाश लीला को कथित विकास के लिये आवश्यक परिणिति घोषित कर चुका है उन नेता,मंत्री,अधिकारी व कथित समाजसेवियों की फेहरिस्त भी लंबी हो गई है, जिन्होने जंगल कटाई को धंधे के रुप में अपना कर अपने आपको समृद्ध कर खुद को बहरा व अंधा घोषित कर रखा है <br /><br />\कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-26111882034862469532008-05-01T10:30:00.001+05:302008-05-01T11:14:28.942+05:30सरकारी बेबसाइट में आदिवासियों की धर्म संस्कृति का गलत निरुपण:अपराधिक कृत्यबस्तर के आदिवासी बुद्धिजीवी इन दिनो काफी उद्वेलित हैं, मामला काफी गंभीरहै | लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्रों में अपनी सेवा देने वाले कथित बुद्धिजीवी प्रशासनिक अधिकारी बस्तर कमिश्नर गणेश शंकर मिश्रा ऐसे घृणित सोच रखते होंगे इसमें मुझे संदेह है | आरोप है कि श्री मिश्रा ने बस्तर के आदिवासियों की मौलिक सांस्कृतिक विशेषता "घोटुल" को लेकर अपने विचार प्रदर्शन में आदिवासियों की भावना को ठेस तो पहुंचाया ही, साथ ही घोटुल की गलत ब्याख्या भी की |प्रदेश सरकार की बेबसाइट में घोटुल को विवाह योग्य जोङों की डेटिंग व फ्री सेक्स का केन्द्र बताया जाना निसंदेह प्रदेश सरकार के कथित बुद्धिजीवियों की आदिवासी संस्कृति की समझ की पोल खोलता है | घोटुल को लेकर विश्व भर में भ्रमात्मक अवधारणा ऐसे ही समझदारों ने बनाया है | आदिवासियों के धार्मिक आस्था व सांस्कृतिक गतिविधियों का एक पवित्र केन्द्र होता है| यंहा आदिशक्ति बुढादेव की पूजा होती है | उक्त बेबसाइट में अपमान जनक ढंग से यह भी लिखा है कि आदिवासी नहाने के बाद कपङे नही धोते,तथा जानवरों की तरह पानी पीते हैं| आदिवासियों की सादगीपन व परम्पराओं का खुलेआम मजाक उङाने के खिलाफ बस्तर के जंगल में बिरोध के स्वर गूंजने लगे हैं |कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-13940108935608263182008-04-30T09:24:00.000+05:302008-04-30T09:24:11.186+05:30bastar samachar: जङ से उजाङे जा रहे जंगल<a href="http://ghotul.blogspot.com/2008/04/blog-post_30.html">bastar samachar: जङ से उजाङे जा रहे जंगल</a>कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-54395609244437866422008-04-30T06:33:00.008+05:302008-04-30T09:14:16.514+05:30जङ से उजाङे जा रहे जंगल<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfQfaGTmsI/AAAAAAAAADs/VjhY8tEDhkk/s1600-h/Image%28198%29.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://bp1.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfQfaGTmsI/AAAAAAAAADs/VjhY8tEDhkk/s320/Image%28198%29.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5194849933195451074" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp2.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfO1qGTmrI/AAAAAAAAADk/JhMshdzqKvU/s1600-h/Image%28197%29.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://bp2.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfO1qGTmrI/AAAAAAAAADk/JhMshdzqKvU/s320/Image%28197%29.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5194848116424284850" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfN4KGTmqI/AAAAAAAAADc/sZ6g6DagFtU/s1600-h/Image%28196%29.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://bp0.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfN4KGTmqI/AAAAAAAAADc/sZ6g6DagFtU/s320/Image%28196%29.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5194847059862330018" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp1.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfMvaGTmpI/AAAAAAAAADU/LbLZ2JRv-II/s1600-h/Image%28195%29.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://bp1.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfMvaGTmpI/AAAAAAAAADU/LbLZ2JRv-II/s320/Image%28195%29.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5194845810026846866" border="0" /></a><br /><a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp2.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfLgqGTmoI/AAAAAAAAADM/VKJWBoTFwHc/s1600-h/Image%28194%29.jpg"><img style="margin: 0px auto 10px; display: block; text-align: center; cursor: pointer;" src="http://bp2.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SBfLgqGTmoI/AAAAAAAAADM/VKJWBoTFwHc/s320/Image%28194%29.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5194844457112148610" border="0" /></a>उपरोक्त सभी चित्र बस्तर के जंगल की दुर्दशा की कहानी बयान कर रही है | यह कहानी घट रही है, कोंडागांव से नारायणपुर होते हुये राजनांदगांव तक जारी सङक चौङी करण के कथित विकास कार्यक्रम के दौरान | सागौन,साल,हरे-भरे व फल लगे आम सहित हजारों इमारती और फलदार बृक्षों की बलि क्या विकास की अनिवार्य परिणिति है ? इन पेङों की कीमत केवल कुछ अरब नही, उससे कंही बढ कर है |कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-67556981843512530442008-04-22T15:37:00.001+05:302008-04-22T15:56:31.683+05:30निष्पक्षता के भ्रमात्मक आवरण के खिलाफजी हां!हम पूरे दावे के साथ स्वीकार करते हैं कि हम निष्पक्ष नही हैं | बल्कि यह कहें कि इस ब्लग की जरूरत भारतीय पत्रकारिता में अचानक घुस आये छद्म निष्पक्षता के नाम पर संवेदन शुन्यता के कारण ही पङा है | पत्रकार मूक-दर्शक बनकर अपने आस-पासघट रहे,समाज और देश को पीछे की ओर ले जाने वाली घटनाओं और शोषण चक्र को केवल परोसने के काम में लगे हुये हैं |<br /> <br />पत्रकारों के लिये किसी कन्या के साथ होने वाला बलात्कार, और किसी आदमी को जलते हुये देखना केवल समाचार बनकर रह गया है | यह पत्रकारिता की चारित्रिक विभीत्सता को प्रदर्शित नही करता तो और क्या है ? आप एक जलते हुये आदमी को केवल इसलिये बचाने की कोशिश नही करते कि उसकी मौत को आकर्षक खबर का सामान बनाकर क्रय-विक्रय के लिये सूचना बाजार में बेच सके !<br /><br />बहुत दिन हुये छत्तीसगढ के कांकेर में एक अवैध व निर्मम प्रशासनिक कार्यवाही का बिरोध करते हुये मैने एक आई ए एस अफसर का गुस्सा झेला था,तब एक प्रतिष्ठित दैनिक के संपादक ने मुझे सलाह दी थी कि पत्रकार का काम केवल घटनाओं को प्रत्यक्षदर्शी रहकर देखना और पाठक के सामने परोसना है |<br /><br />आज गंभीरता से विचार करें तो समझ आयेगा कि कई खुबियों के बावजूद पत्रकारिता अपने दायित्वबोध से भटक चुका है | लेकिन संवेदनहीनता का सारा दोष पत्रकारों के सर पर मढना ठीक नही होगा | सच तो यह है कि उपभोक्ता-वादी बाजार ब्यवस्था ने मानव गरिमा और संस्कृति के सारे मुल्य मिटा देने का अभियान चला रखा है , यह सब उसी की परिणति है | उत्तरदायित्य विहीन व इंसानियत बिरोधी पत्रकारिता ने पैर पसार लिया है,जंहा दिखावा ,सत्ता-पक्ष और माफिया की चाटुकारिता और चटकारा युक्त प्रस्तुति के अलावा और कुछ नही |जनता के हित में अपनी सामाजिक भूमिका का निर्वाह न कर पाने की अपनी मजबूरी और नपुंसकता को छिपाने के लिये ही निष्पक्षता के अपने भ्रमात्मक दायित्व का सृजन कर लिया गया है |<br /><br />सच्चाई यह है कि भारतीय पत्रकारिता का इतिहास कभी भी निष्पक्ष नही रहा है |बल्कि पूर्ण संवेदनशीलता की प्रवित्ति के साथ एक हांथ में झंडा और दुसरे हांथ में कलम थामे भारतीय पत्रकारिता की शुरुवात हुई है |झंडे पर हांथ की पकङ कलम की अपेक्षा ज्यादा मजबूती से दिखाई देता है |साफ शब्दों में कहें कि पत्रकार अपने दायित्व का निर्वहन करने वाला नागरिक पहले होता है,पत्रकार बाद में |<div class="categories"><br /></div>कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-74776415313825959002008-04-22T05:44:00.000+05:302008-04-22T07:34:37.973+05:30े सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथपत्र के आंकङे<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp2.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SA1HWXrW1wI/AAAAAAAAAC4/Q6NJIs7XIlw/s1600-h/salwa%2Bjudum%2Bcanon%2Bfodder.jpg"><img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://bp2.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SA1HWXrW1wI/AAAAAAAAAC4/Q6NJIs7XIlw/s320/salwa%2Bjudum%2Bcanon%2Bfodder.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5191884395066611458" border="0" /></a><br />नक्सलियों ने सन् 2007 के दौरान 635 हमले किये हैं जिनमें 242 नागरिकों और 125 सुरक्षा बल के जवानों की मौत हुई है. उन्होंने स्कूल, पुलिस चौकियों, पंचायत भवन, रेलवे सम्पत्ति, बिजली टावर, खदान आदि ढहाए हैं. कहा गया है कि इस एक साल में नक्सलियों ने 55 प्राथमिक स्कूल भवन, 8 पंचायत भवन, 9 शाला आश्रम, 9 हास्टल, 8 आंगनबाड़ी केन्द्र और 18 अन्य भवनों को नष्ट किया है. इनके भय से बस्तर के भयभीत ग्रामीणों ने राहत शिविरों में शरण ले रखी है और इन शिविरों में भी नक्सली हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं. इन परिस्थितियों में नक्सलियों के खिलाफ जनता की ओर से खड़ा किया गया सलवा जुड़ूम अभियान जबरिया रोकना सरकार के लिए संभव नहीं है.<br />शपथ पत्र में कहा गया है कि सरकार ने बस्तर में 3400 विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की है, जिसका पुलिस एक्ट में प्रावधान है. ये एसपीओ नक्सलियों के आतंक को रोकने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं.असाधारण परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर की तरह यहां भी एसपीओ कारगर हैं. सरकार ने कहा है कि कहीं-कहीं यह संयोग है कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ने वाले एसपीओ में से कुछ सलवा जुड़ूम के सदस्य हैं.कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-66897432875219530342008-04-15T09:00:00.000+05:302008-04-15T09:23:16.349+05:30<a href="http://bp3.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SAQjjYAQKhI/AAAAAAAAABw/M7jDhPmp1y0/s1600-h/DSCN0553.jpg"><img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5189311761283557906" style="CURSOR: hand" alt="" src="http://bp3.blogger.com/_kHwc9WuSVxM/SAQjjYAQKhI/AAAAAAAAABw/M7jDhPmp1y0/s320/DSCN0553.jpg" border="0" /></a><br /><div>बस्तर के अंदुरनी छेत्रों के गाँवो मे ऐसा ही नजारा देखने को मिलेगा यंहा पहले स्कूल लगता था </div>कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6932955722433521608.post-48756257720102376452008-04-15T07:35:00.000+05:302008-04-15T08:38:17.863+05:30<div align="left">जुडूम आन्दोलन या आसलवा-तंक ? फैसला आज - <blockquote>कहाने को तो सलवा-जुडूम एक स्व:-स्फूर्त आन्दोलन है , पर कई मौके पर यह घोषित हो गया है कि यह सरकार प्रायोजित है नक्सली समस्या से ग्रस्त छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा चलाये जा रहे सलवा-जुडूम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे दायर याचिका पर आज सुनवाई होगी इस याचिका मे यह सवाल उठाया गया है कि नक्सलियों से मुकाबला के लिए सरकार द्वारा जनता के हाथो हथियार थमाना क्या उचित है ? इस याचिका मे न्यायलय से अपील कि गई है कि सलवा-जुडूम पर प्रतिबंद लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया जाए </blockquote></div>कमल शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/00380688123986085816noreply@blogger.com