कांकेर - स्कूल बसो के लगातार दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाओं से कंाकेर जिला प्रशासन कोई सबक नही ले रहा है। यहां के अनेक निजी स्कूल बच्चो को घर से स्कूल लाने ले जाने के लिए सुप्रीम कार्ट द्वारा तय मापदंण्ड की खुलेआम धज्जीयां उड़ा रहे है। खुले व पुराने वाहनो में ठूंस कर भरे बच्चों के जीवन पर खतरा बना हुआ है। पिछले दो साल के भीतर ही कांकेर में चार बार स्कूल वाहन दुर्घटना ग्रस्त हो चुके है, इनमें एक बच्चे की मृत्यु तथा कई बार बच्चे घायल भी हुए है।
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रत्येक वाहन पर एक अटैण्डेट और एक शिक्षिका या शिक्षक का भी होना जरूरी है। जबकि यहां इस नियम का पालन किसी भी संस्था द्वारा नही किया जा रहा है। निर्देश के अनुसार निर्धारित संख्या में ही बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए किन्तु नगर के दो बड़े निजी स्कूल आंगलवैदिक व सेन्टमाईकल की बसों में नर्सरी के बच्चों को भी खड़े होकर यात्रा करना पड़ता है। वहीं कई वाहनों की खिडकियों में ग्रिल भी नही लगे है, कई संस्थानो द्वारा २० वर्ष पुरानी खटारा गाडिय़ों का प्रयोग भी किया जा रहा है।
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