सोमवार, 30 जनवरी 2012

दस लाख रूपये से ज्यादा के ईनामी 4 महिला सहित 7 हार्डकोर नक्सलियों का आत्म समर्पण

कांकेर :-  दस लाख रूपये से ज्यादा के ईनामी 4 महिला सहित 7 हार्डकोर नक्सलियों को आत्म समर्पण कराने में पुलिस को सफलता मिली है । आत्म समर्पित सभी नक्सली स्थानीय आदिवासी हैं । आत्मसमर्पित नक्सलियों में पूर्व बस्तर डिविजन कमेटी सदस्य, परतापुर जनमिलिशिया कमांडर , सीएनएम एरिया कमांडर, कोयलीबेड़ा क्षेत्र के नक्सली कमांडर व डिप्टीकमांडर शामिल हैं । उन्होंने स्वीकार किया कि नक्सली संगठन में आंध्रवासियों का कब्जा है और वे स्थानीय नवजवानों को जबरदस्ती वारगु्रप में शामिल कर उनका शोषण करते हैं ।
    पुलिस अधीक्षक कार्यालय में नक्सलियों के आत्म समर्पण की घोषणा बस्तर के आईजी टीजे लागकुमेर ने की। इस अवसर पर कांकेर जिले के डीआईजी जयंत थोर्राट भी मौजूद थे । पुलिस अधीक्षक राहुल भगत ने बताया कि इन नक्सलियों को केन्द्र व राज्य शासन द्वारा घोषित पुनर्वास कार्यक्रम का लाभ मिलेगा । जिसके तहत उन्हें नकद एकमुश्त राशि, शासकीय सेवा व जमीन या किसी रोजगार के लिए सहायत दी जायेगी । राहुल भगत के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सलियों पर विभिन्न थानों में 80 से ज्यादा मामले पंजीबद्ध हैं । आत्मसमर्पित नक्सलियों में पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी के सक्रिय सदस्य सुनील उर्फ राजेश कुमार मतलाम, उसकी पत्नी एवं कोरर एरिया कमेटी की सीएनएम कमांडर जैनी उर्फ जयंती कुरैटी, परतापुर क्षेत्र के जनमिलिशिया कमांडर रामदास एवं उसकी पत्नी व पानीडोबिर कोयलीबेड़ा एलओएस के डिप्टी कमांडर सुशीला, सीतापुर कोयलीबेड़ा एसओएस के कमांडर जयलाल एवं उसकी पत्नी सीतापुर एलओएस की सक्रिय सदस्या आसमनी उर्फ सनाय और रावघाट में सक्रिय प्लाटून न.25 की सदस्या श्यामा मंडावी शामिल हैं । इनमें सुनील उर्फ राजेश मतलाम पर तीन लाख रूपये से ज्यादा का ईनाम घोषित था । इसके अलावा अन्य सभी समर्पित नक्सलियों पर कुल 7 लाख से ज्यादा का ईनाम घोषित था ।
                                                                                                                                                    आत्म समर्पित 7 हार्डकोर नक्सलियों में से 3 दम्पत्ति व एक अविवाहित महिला है । पता चला है कि नक्सलियों के आत्मसमर्पण के पीछे पीढ़ापाल क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका है । हार्डकोर नक्सली सुनील उर्फ राजेश ने पत्रकारों के समक्ष स्वीकार किया कि नक्सली आदिवासी विकास के रास्ते में अवरोध उत्पन्न कर रहें हैं, नक्सली संगठन में अब भी आन्ध्रप्रदेश के नेता हावी हैं जो स्थानीय बेरोजगार युवक-युवतियों को जबरदस्ती वारग्रुप में शामिल करते हैं और उनका शोषण करते हैं । आत्मसमर्पित नक्सलियों ने यह भी स्वीकार किया कि नक्सली संगठन में गुटबाजी चल रही है । उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई दिनों पूर्व वे आत्मसमर्पण कर चुके हैं जबकि गांधी जी की पुन्यतिथि में ही उन्हें पत्रकारों के समक्ष पेश करने की योजना पुलिस ने बना रखी थी।

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