मंगलवार, 20 दिसम्बर 2011

करोड़ो के कीमती जमीन पर हो रहे कब्जे को लेकर प्रशासन का मौन : परदे के पीछे अनुबंध की पुष्टि


 कांकेर - शहर के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नजूल की बेशकीमती भूमि पर चौड़ीकरण की आड़ में करोड़पति व्यवसायियों द्वारा बेरोकटोक अवैध निर्माण किया जा रहा है। जिला प्रशासन को इसकी शिकायत करने एवं ध्यान में लाने के महीनों बाद भी कोई कार्यवाही नही करने से परदे के पीछे हुए किसी अनुबंध की पुष्टि होती है।
                 एक ओर गरीब एवं आवासहीनों को अनिवार्य जरूरत के लिए भी अनुपयोगी व पहाड़ी जैसे जगहों पर बनाये जा रहे झोपडिय़ों को तोडऩे के लिए प्रशासन कोई कसर नही छा़ेड रही है। वहीं शहर में जिला प्रशासन के नाक के नीचे करोड़़ों की बहुमूल्य भूमि पर धडल्ले से चल रहे निर्माण के प्रति प्रशासन की रहमदिली सदेंह के दायरे में है। उल्लेखनीय है कि इसी प्लाट से लगे हुए नगर पालिका की १४४ वर्ग फीट की एक-एक दुकान २०से २५ लाख रूपये तक बेची गई है। जबकि अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा की जा रही दुकानों का क्षेत्रफल इससे चार गुना से भी अधिक है।
  छान-बीन करने से यह पता लगा कि शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की सीमा में आने वाले बड़े व्यवासायियों द्वारा प्रशासन के साथ गुप्त समझौते के चलते करोड़ो की भूमि हथियाने का यह कारोबार फल-फू ल रहा है। चौड़ीकरण कार्य अभी तक तो शुरू ही नही हो पाया वहीं पर्दे के पीछे हुए गैर कानूनी अनुबंध के आड़ में अपने दुकानों के पीछे बीना किसी अनुमति के दो-दो मजिंल तक निर्माण किया जा चुका है।
एक तरफ सत्ताधारी पार्टी के कंाकेर क्षेत्र के विधायक श्रीमती सुमित्रा मारकोले को भी शहर में निवास गृह के लिए नजूल भूमि का पट्टा दो वर्ष बीत जाने पर भी नही मिल पाया है। गरीबों बेघरों को छोटी-मोटी झोपडिय़ंा बनाने नगर पालिका एंव नजूल विभाग के अधिकारी ढेरों अनापत्ति प्रमाण पत्रों कीमांग करते है वहीं शहर के बीचों-बीच करोड़ो के कीमती जमीन पर हो रहे कब्जे को लेकर प्रशासन का मौन साधे रहना सोचनीय है।
अवैध कब्जा कर रहे एक व्यवसायी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण को लेकर जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित व्यावसायियों के साथ बैठक में तय किया गया था कि मुआवजा के बदले व्यापारियों को पीछे कब्जा करने की अनुमति दी जायेगी, किन्तु बाद में इसके लिए जिलाधीश और कमिश्रर के नाम पर दो-दो लाख रूपये देने पड़े।
इस मामले को लेकर मुख्यनगरपालिका अधिकारी  रमेश जायसवाल का कहना है कि निर्माण पूरी तरह से अवैध है, इसके लिए किसी प्रकार की अनुमति नही ली गई है।
जबकि   कांकेर   एसडीएम पीके शंाडिल्य के अनुसार किसी भी निर्माण के लिए नगरपालिका की अनुमति की जरूरत नही है। वहीं उन्होने व्यावसायियों द्वारा किये जा रहे अवैध निर्माण को जिला प्रशासन की सहमति और जगह को अनुपयोगी बताते हुए कहा कि यह वर्षो से लटके सडक चौड़ीकरण के लिए जरूरी हो गया था।
 कांकेर   जिलाधीश निर्मल कुमार खाखा ने किसी भी अवैध निर्माण के लिए प्रशासन की सहमति को गलत बताते हुए महिनों से चल रहे अवैध निर्माण के सबंध में किसी भी जानकारी से इंकार करते हुए इस मामले की जांच कराने की बात कही।

1 टिप्पणियाँ:

bharat ने कहा…

bahut badiya bhaiya