बृहस्पतिवार, 8 दिसम्बर 2011

राशन लेने के लिए तीस किमी तक पैदल चलना पड़ता है:सार्वजानिक वितरण प्रणाली का हाल बुरा


कंाकेर- गरीब परिवारों को सस्ते दर पर खाद्या्न उपलब्ध कराने के नाम पर देश-विदेश में चर्चित छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना का कंाकेर जिले में बुरा हाल है। जिले में बीस से ज्यादा पंचायत में अब तक राशन दुकान नही खुल पाया है। इन पंचायतो के कई आश्रित ग्रामों को तो तीस किमी तक राशन लेने के लिए पैदल चलना पड़ता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में १५ शहरी व ३६६ ग्रामीण राशन दुकान है। इनमे १८ पहुंच विहीन  व नक्सल प्रभावित क्षेत्रो में है। इनमे से कई दुकान शासन की बेबसाईट में जिन गांवो में चालु दिखाया जा रहा है वास्तव में है किसी और गांव में। जिला मुख्यालय से मात्र तीस किमी दूर मूरागांव पंचायत के मुजालगोंदी, बुधियारमारी, मूरागांव, भैसगांव के लोगों को राशन लेने पीढापाल आना पड़ता है। इसमे भैसगांव व बुधियारमारी के ग्रामीणो को पैदल १५ किमी या जीप से कोरर के रास्ते तीस किमी से ज्यादा सफर करना पड़ता है।
                          नरहरपुर विकासखंण्ड के रावस के ग्रामीणें को अपने ही पंचायत मुख्यालय बासपत्तर के राशन दुकान से चावल, मिट्टीतेल लेने १८ किमी चलना पड़ता है। नरहरपुर क्षेत्र के ही मावलीपारा के ग्रामीण माडाभर्री भानुप्रतापपुर में परसकोट के ग्रामीणो को आसुलखार से राशन ले जाना पड़ता है। दुर्गुकोन्दल विकासखंण्ड में ताराईघोटिया , चेरगांव, कराकी व गोडपाल का राशन दुकान नक्सलियों के डर से कोडेकुर्से में ही चलाया जा रहा है।
                         अंतागढ विकासखंण्ड  में बन्डापाल, करमरी, मातला, अर्रा व नागरबेड़ा पंचायत के ग्रामीणो को भी नक्सलियों से डरी प्रशासनिक व्यवस्था का खामियाजा भुगतते हुए दस किमी से लेकर तीस किमी तक का सफर कर आमाबेड़ा आना पड़ता है। वहीं सुरेवाही व बुलावंड के ग्रामीण अंतागढ व कोसेकोन्डा, बोडानार व कलेपरस के ग्रामीणो को ताडेाकी के राशन दुकान में आना पड़ता है।
                      सबसे ज्यादा बुरी स्थिति कोयलीबेड़ा विकासखंण्ड की है, जहां कई राशन दुकान बीएसएफ कैम्प अथवा थाने से जुडे हुए है अथवा उसके भीतर में है। डरे हुए ग्रामीण इन दुकानों में आने से परहेज करते है। दुकानों के लिए जारी आबंटन का रिकार्ड व यहां की फिल्ड की स्थिति में काफी अंतर दिख जाता है।
                  कंाकेर जिलाधीश निर्मल कुमार खाखा का कहना है कि अंदरूनी क्षेत्रो में राशन दुकान नही खुल पाने का कारण सुरक्षा गत व पहुंच की समस्या के अलावा ग्राम पंचायतो के स्वसहायता समूह का संचालन के लिए सामने नही आना है।

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