Thursday, May 1, 2008
सरकारी बेबसाइट में आदिवासियों की धर्म संस्कृति का गलत निरुपण:अपराधिक कृत्य
बस्तर के आदिवासी बुद्धिजीवी इन दिनो काफी उद्वेलित हैं, मामला काफी गंभीरहै | लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्रों में अपनी सेवा देने वाले कथित बुद्धिजीवी प्रशासनिक अधिकारी बस्तर कमिश्नर गणेश शंकर मिश्रा ऐसे घृणित सोच रखते होंगे इसमें मुझे संदेह है | आरोप है कि श्री मिश्रा ने बस्तर के आदिवासियों की मौलिक सांस्कृतिक विशेषता "घोटुल" को लेकर अपने विचार प्रदर्शन में आदिवासियों की भावना को ठेस तो पहुंचाया ही, साथ ही घोटुल की गलत ब्याख्या भी की |प्रदेश सरकार की बेबसाइट में घोटुल को विवाह योग्य जोङों की डेटिंग व फ्री सेक्स का केन्द्र बताया जाना निसंदेह प्रदेश सरकार के कथित बुद्धिजीवियों की आदिवासी संस्कृति की समझ की पोल खोलता है | घोटुल को लेकर विश्व भर में भ्रमात्मक अवधारणा ऐसे ही समझदारों ने बनाया है | आदिवासियों के धार्मिक आस्था व सांस्कृतिक गतिविधियों का एक पवित्र केन्द्र होता है| यंहा आदिशक्ति बुढादेव की पूजा होती है | उक्त बेबसाइट में अपमान जनक ढंग से यह भी लिखा है कि आदिवासी नहाने के बाद कपङे नही धोते,तथा जानवरों की तरह पानी पीते हैं| आदिवासियों की सादगीपन व परम्पराओं का खुलेआम मजाक उङाने के खिलाफ बस्तर के जंगल में बिरोध के स्वर गूंजने लगे हैं |
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