Sunday, December 14, 2008

मुठभेड या हत्या ?



regarding the fake -एनकाउंटर
हुलघाट से लौट कर कमल शुक्ल

पुलिस की हताशा का शिकार हुये ग्रामीण
फर्जी मुठभेड में दो ग्रामीणों को मार गिराया, कई खलियानों में लगायी आग
पूरा समाचार यहां पढे----www.dailychhattisgarh.com of 12 dec 08

हुलघाट से लौट कर कमल शुक्ल पुलिस की हताशा का शिकार हुये ग्रामीण फर्जी मुठभेड में दो ग्रामीणों को मार गिराया, कई खलियानों में लगायी आग






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Thursday, November 6, 2008

बस्तर की बारह विधान सभा निर्णायक भूमिका निभायेंगे





कांकेर. विधानसभा चुनाव की तस्वीर अब कुछ.कुछ साफ हो चली हैए बस्तर संभाग की सभी बारह सीटे फिर से निर्णयाक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। बरसों से कांग्रेस का गढ़ रही इन क्षेत्रोें में पिछले चुनाव के बाद स्थिति बदल चुकी है। कांग्रेस का जमीनी आधार खिसका कर पिछले चुनाव में भाजपा ने इन्ही क्षेत्रों की बदौलत सत्ता पाई थीए सत्ता का पूरा प्रयोग करते हुए भाजपा ने गांव.गांव में पैठ बनाई है वहीं चित्रकोटएकोंटा व दंतेवाड़ा में भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी तथा अंतागढ़ में माक्सवादी कम्यूनिष्ट पार्टी ने फिर गांव.गांव में अपना ं लाल झंडा लहराया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे महेन्दª कर्मा सहित पूर्व मंत्री गांगापोटाईए मनोज मण्डावी व विक्रम उसेण्डीएलता उसेंडीए केदार कश्यप व अनेेक पूर्व विधा.यकोें के भविष्य दांव पर है।
कभी कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले कांकेर व जगदलपुर लोक सभा की अधिकांश सीटों पर पिछले दस वर्षो से कांग्रेस की वापसी नही हुई है। सत्ता में वापसी की छटपटहट में गलती पर गलती करती हुई कांग्रेस का सैद्धांतिक खोखला पन अब की बार स्पष्ट परिलेक्षित हो रहा है। जनता इनके भीतर अलग.अलग गुटएपरिवारवादएगंुडावादए मौकापरस्ती का साक्षात दर्शन कर विकल्प के आभाव में फिर इतिहास दोहराने के लिए मजबूर दिखाई दे रही है। कांग्रेस में बरसों की मेहनत व सेवा से पार्टी में अपनी स्थिति बनाने वाले जमीन से जुडे़ नेताओें की दावेदारी दर किनारकर परिवारवाद की नीति व उपर से प्रत्याशी थोपने का खामियाजा कांकेर और भानुप्रतापपुर में भुगतना पड़ सकता है। यहां से भाजपा ने कददावर नेता वर्तमान विधायक अघनसिंह व संसदीय सचिव देवलाल दुग्गा जैसे नेताओं को टिकट से वंचित कर जहां सर्वथा नये प्रत्याशी उतार कर कंाग्रेस को सीट परोसा था। मगर कांग्रेसी नेताओं के झगडे़ में परोसी गई थाली छिटक गई प्रतीत होती है। कलह के बीच सुलह की राजनीतिक भंवर में फंसे पूर्व राज्यमंत्री व अजीत जोगी के खासम.खास माने जाने वाले मनोजमंडावी भानुप्रतापपुर से बागी होकर ताल ठोक रहे हैए वही कांकेर से जमीनी आधार रखने वाले जनपद अध्यक्ष चन्दªप्रकाश ठाकुर उनके सूर में सूर मिलाकर एक तरफ से भाजपा को वाक ओवर दे दिया है। इन दोनो नेताओं के बीच आपासी ताल.मेल तथा इन्हे मिलने वाले उपरी सर्पोट ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में भ्रम उत्पन्न कर दिया हैं। हवाला व मालिक मकबूजा कांड की लपेटे में आकर बौखलाहट में पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टीए राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी व भारतीय जनता पार्टी का सफर कर थक चुके एक समय के चर्चित आदिवासी नेता अरविन्द नेताम प्रदेश की चिंता छोड़ धृतराष्ट्रीय भूमिका निभाते हुए अपने ही भाई शिवनेताम की टिकट कटवाकर अपनी लड़की डाण्प्रीति नेताम का टिकट लेकर केवल कांग्रेस कर्यालय में बठै गये है। वे जानते है कि यह अस्वित्व की लड़ाई हैए कई बार छल का शिकार हुए भाई शिवनेताम शरीर से साथ है पर सबसे ज्यादा नुकसान इनके खेमे का सिपहसलार ही इनको पहुंचाने वाला है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश तिवारी ही चुनाव संचालक हैए जिन्होनें नेताम परिवार की राजनीति का खात्मा करने का अपना सूनियोजित अभियान पिछले दस वर्षो से अधिक समय से चला रखा है। चोट खाये हुए अरविन्द नेताम अब भी नहीं कह पा रहे हैए और अनिर्णय की स्थिति में सब.कुछ देख सुनकर भी बर्दास्त करने के लिए मजबूर हैं।

अरविन्द नेताम का परिवादवाद

एक समय के केन्दªीय राजनीति की धूरी रहे आदिवासी नेताओं में से एक अरविन्द नेताम के पिता विश्राम सिंहठाकुर दो बार विघायक चुने गये थे। स्वंय अरविन्द नेताम पंाचबार सांसद रहे है। केन्दªीय सरकार में मंत्री भी रहे हैं। हवाला मामले में फॅंसने के बाद पत्नी छबीला नेताम को सामने कर सांसद बनाया। भाई शिवनेताम भी कईबार विधायक रहे व संसदीय संचिव व वनमंत्री पदो पर सुशोभित रहे। छठी अनुसूची विवाद व मालिक मकबूजा विवाद ने नेताम ही नहीं वरण संपूर्ण बस्तर में कांग्रेसी राजनीति पर भी खास असर डाला था। मालिक मकबूजा कांड ने जहाॅ नेताम और महेन्दªकर्मा को एक साथ बौखला दिया था वही छठी अनुसूची ने इन्हे कांग्रेस के भीतर अलग.अलग धूरी के रूप में स्थापित कर दिया मगर दोनों का आधार ही खोखला था और फलतः दोनों उखड़ गये। इनके साथ ही कांग्रेस भी संपूर्ण बस्तर में चरमरा गई।

मुदद्ो से भटकी हुई कांग्रेस
वर्तमान विधान सभा चुनाव में जनता विकल्प खोज रही है। भयएभूखएभ्रष्ट्राचार के नारे के साथ पिछली बार के भाजपा के लुभावने भवंर में फंस गये थे। इन पांच वर्षांंे में बस्तर ने भय तो भयावह रूप से देख लियाए और भ्रष्टाªचार में पूरे देश में पहचाना जाने लगा। लोगों की नजर विपक्ष की भूमिका तलाश रही है। इन पांच वर्षो में कांग्रेस ने कौन सा जन आन्दोलन खड़ा किया और भाजपा के चरित्र से अलग कौन सा पहचान बनाये रखा घ् । भाजपा कांग्रेंस मय हो गई या कांग्रेस भाजपा मयी । मात्र दो हजार नक्सलियों को बस्तर से भगाने के नाम शुरू किया गया सरकारी आतंकवाद सलवा जुडुम के नाम पर लाखों आदिवासी अपनी जमीन छोड़कर दर.दर का मोहताज हो पड़ोसी राज्यों में भटक रहे हैंैैै। वही 80 हजार से अधिक लोग कैम्पों में नरक सा जीवन जीने के लिए मजबूर हो गये है। सरकारी समर्थक आतंक से प्रभावितों को कांग्रेस से उम्म्मदी थी पर उसने भी इसे मुद्दा नही बनाया बल्कि विपक्ष के नेता महेन्दªकर्मा तो घोषित रूप से इस कथित स्वः स्फूर्त दमन कारी आन्दोलन के साथ रहे। वहीं दूसरी ओर भाजपा के पांच वर्षा े के शासनकाल में इुए अरबों रूपयों के रोजगार गांरटीए राष्ट्रीय समविकास योजनाए

विधायकनिधि आदि के राशियों के घोटाले मेें कांगे्रसी ठेकेदारोंए सप्लायरों व सक्रिय कार्यकताओं की भूमिका ने दोनों का मिला.जुला जनविरोधी चेहरा का विद्रुप रूप उजागर कर दिया। अब जनता उम्मीद किससे करेघ् कांकेर में तो और हद् हो गईए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश तिवारी द्वारा संचालित शहर के सबसे मंहगे स्कूल आंग्लवैदिक कान्वेट को 30 लाख रूपये से अधिक भाजपा विधायक द्वारा व शासन द्वारा कुर्सी टेबल व छत निर्माण आदि के लिए उपलबध कराया गयाए जबकि शासकीय स्कूलों में बैठने के लिए टाट पट्टी तक नही । शायद यही कारण है कि देश भर में चर्चित करोड़ो का रोजगार गारंटी घोटला कांग्रेस का चुनावी मुद्दा नहीं है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश तिवारी शिक्षाकर्मी घोटाला का मुद्दा भी नहीं उछालते है क्योंकि ऐसा ही एक मामला उनके जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहने के समय से दबा पड़ा हुआ है। कांग्रेस और भाजपा के मिल.जुले जन विरोधी षड़यंत्रों को इसबार जनता ने समझना शुरू किया हैए जो तीसरी शक्ति के उदय की ओर स्पष्ट संकेत कर रही है।

अंतागढ़रू नमोशुद मुद्दा गले की हड्डी

फिलहाल ताजा स्थिति के तहत् जो नजारा बस्तर का दिखाई दे रहा हैए उसके हिसाब से अंतागढ़ में भाजपा के विक्रम उसेण्डी व कांग्रेस मे मन्तुराम पवार के बीच सीधा मुकाबला परिलक्षित हो रहा है। पिछले सभी चुनाव में बंगाली मतदाताओं के बीच अपना मजबूत आधार रखने वाली माक्र्सवादी कम्यूनिष्ट पार्टी ने अपना प्रभाव डाला है तथा निर्णायक भूमिका निभाया हैए परन्तु इसबार लालझंडे का रंग कुछ फीका दिखाइ्र दे रहा हैए यहां के चुनाव में विकासएभ्रष्ट्राचार के अलावा नमोशुदो को अनुसूचित जाति में शामिल करने शिक्षाकर्मी घोटाला आदि स्थानीय मुदृदा भी प्रभाव डालने वाला है। मुख्यमुत्री रमनसिंह ने अपना पहला चुनावी सभा यहां करके जता दिया है कि विक्रम उसेण्डी उनके कितने प्रिय है।

भानुप्रतापपुररू सूर बिगाड़ रही नगाड़ा

अचानक हासियो से प्रकट हुई पूर्व मंत्री व कभी अर्जून सिंह के खास समर्थक रही गंगा पोटाई यहां प्रत्याशी हैं। उनके झटके से तिलमिलाए अजीत जोगी के खासमखास पूर्व राज्य मंत्री मनोज मंडावी ने नगाड़ा चुनाव चिन्ह लेकर विदोह का ताल ठोक दिया हैए खबर है कि अपरोक्ष रूप से उन्हे जोगी जा का इशारा मिला हुआ है। इधर कद्दावर नेता देवलाल दुग्गा का टिकट काट कर केवल सरपंच रहे जमीनी कार्यकर्ता को टिकिट देकर भाजपा कार्यकताओं को भी भौचक्का कर दिया है। दुग्गाजी के बारे में खबर है कि वे चुप नहीं रहेंगेए टिकट विवरण पर असंतोष तो वे अपने समर्थकों के साथ राजधानी में जता चुके है। अब भाजपा के उपरी नेतृत्व को वे उनकी गलती का अहसास कराने की ठान चुके है। फलतः यहां त्रिकोणीय संधर्ष की स्थिति है।

कांकेरः गांव की गोरी बनाम शहर की छोरी


भाजपा कांग्रेस के लिए टिकट वितरण में सबसे ज्यादा विवादित रहे कांकेर में त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बन गयी है। भाजपा ने यहां कार्यकर्ताओं में विरोध की परवाह करते हुए वर्तमान विधायक अधनसिंह ठाकुर का पत्ता काटकर जहां तीन वर्ष पहले राजनीतिक जीवन की शुरूआत करने वाले सुमित्रा मारकोले पर भारोसा जताया है। वहीं कांग्रेस ने दिल्ली में पढ़ी.लिखी डा0 प्रीति नेताम को उतारा है। कांग्रेस के वंचित दावेदार शंकर.
ध्रुवाए श्यामा ध्रुवाए शिवनेतामए नितिन पोटाई आदि ने अपना मुंहबंद कर गुस्सा पी लिया है वहीं जनपद अध्यक्ष व युवाओं के बीच लोकप्रिय चन्दप्रकाश ठाकुर ने मनोज मण्डावी के सूर में सूर मिलाकर यहां भी नंगाड़ा बजा दिया है। आदिवासी समाज के एक बडे़ संगठन का इन्हे समर्थन तथा परिवारवाद का राजनीतिक विरोध व युवाओं का साथ इन्हे तिर्यक संघर्ष में ला खड़ा किया है।

केशकालएकोंडागांवए नाराणपुरए बस्तरः सीधा संधर्ष
.केशकाल विघानसभा में भाजपा ने पांच माह के पूर्व विधायक सेवकराम नेताम पर दांव आजमाया है वहीं कांगे्रस ने यहां के मजबूत दावेदार फूलोदेवी नेताम का टिकट काटकर धन्नुराम मरकाम को उतारा है। कांग्रेस भाजपा दोनों में ही यहां अन्र्तकलह मचा हुआ है। मगर यहां दोनो के बीच सीधा संधर्ष दिखाई दे रहा है। लगभग ऐसी ही स्थिति कांेडगांव में हैए जहां राज्यमंत्री लता उसेण्डी भाजपा से तथा मोहनलाल मरकाम कांग्रेस से उम्मीद्वार है। नारायणपुर में मंत्री केदार कश्यप का भविष्य दांव पर लगा हुआ हैए नई सीट है जहां बीजेपी कार्यकर्ता और कांग्रेस कार्यकर्तौ एक जूट होकर बिना अन्तविरोधक के आमने.सामने है। इस विधान सभा में मतदान का प्रतिशत हारने.या जीतने का कारण बन सकता है। ज्ञात हो कि नाराणपुर घोर नक्सली प्रभावति क्षेत्र हैं। कांग्रेस प्रत्यशी को नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में कुछ ज्यादा वोट मिलने की संभावना तथा भाजपा कार्यकार्ताओं के भीतर इन क्षेत्रों में पहूूंचने को लेकर बैठा डर भाजपा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। वहीं बस्तर विधान सभा क्षेत्रों में भाजपा के डा0 सुभाउ कश्यप का कंाग्रेस के लखेश्वर बघेल से सीधा मुकाबला है।



बीजापूरएदंतेवाड़ाएकांेटारू सलवाजुडुम का भविष्य तय करेगा।

सलवाजुडूम प्रभावित तीनो विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशीयों के भाग्य का फैसला सलवाजुडुम का समर्थन व विरोध के आधार पर होगा। इस क्षेत्र में मतदातओं का वर्ग स्पष्ट रूप से दो खेमों में बटा ुहुआ है। यहाॅ वे सलवा जुडूम के पक्ष में है या विरोध में है। यहां का चुनाव 20 हजार से अधिक उन मतदाताओं द्वारा भी प्रभावित होगा जो सरकारी कैम्प में सलवाजुडूम समर्थकों व सेना के ्रघेरे में है। साथ ही यहां के चुनाव में नक्सलियों एद्वारा अपनी चुनाव बहिष्कार की नीति से अब.तब चुप्पी साधना भी कुछ संकेत दे रही है। संधर्ष में फॅसे हुए है। यहां भाजपा ने इनके मुकाबले कमजोर प्रत्यशी भीमा मंडावी को उतारकर जहां औपचारिकता पूरी की हैए वहीं भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी ने दमदारी से मनीष कुंजाम को इनके खिलाफ खड़ा किया है। यहां का चुनाव ही पूरे देश में एक संदेश देगा कि यहां की जनता आतंक के खिलाफ आतंक के साथ है या नक्सली समस्या के निदान के लिये किसी और रास्ते की जरूरत महसूस करता है। बीजापूर में भी भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी निर्णायक भूमिका में है यहां भाजपा के महेश गागदा राजनीतिक अस्तिव बचाने की कयावद में लगे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेन्द पामभोई के खिलाफ लड़ रहे हैं। वहीं कोन्टा में सीपीआई के रामा सोढ़ी व कांग्रेस के कवासी लखमा और भाजपा के पद्म नंदा के बीच त्रिकोणीय


चित्रकोटरू सीपीआई उलटफेर कर सकती है

चित्रकोट विधान सभाक्षेत्र में इस बार पूरी ताकत के साथ उतरी भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी निर्णायक भूमिका में हैए यहां भाकपा के रामनाथ सर्फे भाजपा के बेदुराम कश्यप तथा कांग्रेस के श्रीमती प्रतिभा शाह के लिए चुनौती प्रस्तुत कर रहे हैं। कंाग्रेस ओैर भाजपा के प्रत्याशी कार्यकर्ताओ के अन्र्तकलह के बीच मान.मौव्वल में परेशान है जबकि भाकपा के कार्यकर्ता गांव.गांव पहुंचकर जनता के सामने विकल्प के रूप में अपने प्रत्याशी को प्रस्तुत कर रहे हैं।
जगदपुररू सीधा मुकाबलाए अन्र्त विरोध से तय होगा फैसला.नये परिसीमन से उभरकर आया बस्तर की एक मात्र सामान्य सीट के चुनाव पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी। चुनाव से पहले ही दोनों ही पार्टी के घोषित प्रत्याशी एक बड़ी लडाई जीतकर मैदान में आये हैए पर इनका उत्साह घोषित.अघोषित तौर पर विरोध कर रहे कार्यकर्तााओं ने कम चित्रकोट: सीपीआई उलटफेर कर सकती है
चित्रकोट विधान सभाक्षेत्र में इस बार पूरी ताकत के साथ उतरी भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी निर्णायक भूमिका में हैए यहां भाकपा के रामनाथ सर्फे भाजपा के बेदुराम कश्यप तथा कांग्रेस के श्रीमती प्रतिभा शाह के लिए चुनौती प्रस्तुत कर रहे हैं। कंाग्रेस ओैर भाजपा के प्रत्याशी कार्यकर्ताओ के अन्र्तकलह के बीच मान.मौव्वल में परेशान है जबकि भाकपा के कार्यकर्ता गांव.गांव पहुंचकर जनता के सामने विकल्प के रूप में अपने प्रत्याशी को प्रस्तुत कर रहे हैं।

सीधा मुकाबलाए अन्र्त विरोध से तय होगा फैसला

नये परिसीमन से उभरकर आया बस्तर की एक मात्र सामान्य सीट के चुनाव पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी। चुनाव से पहले ही दोनों ही पार्टी के घोषित प्रत्याशी एक बड़ी लडाई जीतकर मैदान में आये हैए पर इनका उत्साह घोषित.अघोषित तौर पर विरोध कर रहे कार्यकर्तााओं ने कम कर दिया कर दिया अचानक किसी वजह से चुप्पी साध रखेअचानक किसी वजह से चुप्पी साध रखे किरण देव के समर्थक क्या गुल खिलायेंगे यह तो परिणाम ही बतायेगा। वहीं कांग्रेस के भीतर भी घोर अन्र्तकलह मचा हुआ है। कार्यकर्ता आस.पास के दूसरे विघानसभा क्षेत्रों में प्रचार के लिए निकल गये है। यहां के चुनाव पर मुख्यमंत्री रमनसिंह स्वयं रूचि ले रहे हैए वही कांग्रेस के भी बड़े नेताओं के यहां आने के संकेत है। दोनो प्रत्यशी एक ही समाज व वर्ग के प्रतिनिधित्व करते है। भाजपा से यहां संतोष बाफना तथा कांग्रेस के रेख चंद जैन के बीच सीधा मुकाबला है। किरण देव के समर्थक क्या गुल खिलायेंगे यह तो परिणाम ही बतायेगा। वहीं कांग्रेस के भीतर भी घोर अन्र्तकलह मचा हुआ है। कार्यकर्ता आस.पास के दूसरे विघानसभा क्षेत्रों में प्रचार के लिए निकल गये है। यहां के चुनाव पर मुख्यमंत्री रमनसिंह स्वयं रूचि ले रहे हैए वही कांग्रेस के भी बड़े नेताओं के यहां आने के संकेत है। दोनो प्रत्यशी एक ही समाज व वर्ग के प्रतिनिधित्व करते है।

Monday, May 5, 2008

लाख से ज्यादा पेङ अगले दो महिने में काटे जायेंगे: कौन रोकेगा विनाश?

बस्तर में इन दिनो किसी न किसी बहाने जंगल सफाया करने का काम धङल्ले से जारी है,कंही वैध(?)तो कंही अवैध नक्सली प्रभावित क्षेत्र के बहाने जंहा वनविभाग ने अपनी आंखें बंद कर रखी है वंही इसका फायदा उठाने में लकङी तस्करों ने कोई कसर नही छोङा है वनविभाग के अधिकारी व कर्मचारी की मिली-भगत के कई मामले भी सामने आए है हाल में ही कांकेर के नरहरपुर मे एक रेंजर को गांव वालों द्वारा पकङकर पुलिस को सौंपा गया था
कंही-कंही जंहा नक्सली प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से जंगल कटने से बचा हुआ है तो सङक किनारे के लाखों पेङ नक्सलियों ने ही काटकर सङक में बिछा दिये कथित जनयुद्ध(?) के इन सिपाहियों ने यह दुष्कृत्य पुलिस के साथ मोर्चाबन्दी करते हुये अथवा प्रायः हर महिने बस्तर बंद के आव्हान के दौरान किया पिछले तीन वर्षों में वन कटाई के आंकङों में बहुत बङा योगदान कथित शांति सिपाही(?) सलवा-जूङूम कार्यकर्ताओं का भी है,जिन्होने नये खेत और घर बनाने के नामपर नक्सलियों से मोर्चाबंदी लेते हुये निर्ममता पूर्वक अपने धारदार हथियार पेङो पर चलाये दक्षिण बस्तर के सघन वनो में सलवा - जूङूम कार्यकर्ताओं द्वारा गाजर मूली की तरह पेङ काटे जाने खबरें छपती रही है नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा लेते हुये पुलिस के उपर भी पेङों की कटाई व तस्करों से मिली-भगत का आरोप लगते रहा है तीन वर्ष पूर्व कांकेर से लगे राष्टीय राजमार्ग के किनारे तीन पहाङ सहित हजार एकङ के लग-भग जंगल पुलिस प्रशिक्षण के नाम पर 'जंगल वार' वालों ने हथिया लिये
विकास(?) के नाम पर बनाये गये सरकारी योजनाओं,बांध निर्माण,सङक निर्माण तथा भवन निर्माण आदि निरंतर चलने वाली योजनाओं में हरे-भरे बृक्षों की बलि दी जाती रही है अकेले कोसारटेडा सिंचाई परियोजना में ही अगले दो महिने में 42हजार बृक्षों की कटाई किये जाने का घोषित सरकारी कार्यक्रम है यह परियोजना बस्तर के कोंडागांव क्षेत्र में बनना है, जिसके डूबान क्षेत्र में आ रहे 42हजार बृक्षों में साल,सागौन,आम,साजा के अलावा दूर्लभ प्रजातियों सैकङो वर्ष पुराने पेङ शामिल है इनमे छोटे बृक्षों की गिनती शामिल नही है इस परियोजना के क्रियान्वयन मे वन विभाग भी उत्साह के साथ भिङ गया है पेङों की कटाई के लिये पावर चेन्स की ब्यवस्था वन विभाग ने कर लिया है, जिससे मिनटों मे विशाल बृक्ष को जमीन मे सुलाया जा सकता है इसके लिये वन विभाग को 46करोङ रुपये की राशि भी सिंचाई विभाग द्वारा दिया जा चुका हैवनसंरक्षक के अनुसार दस बिजली चलित आरियों से इन बृक्षों को बरसात से पहले काटा जायेगा

इसके अलावा कोंडागांव से राजनांदगांव रोड चौङीकरण के नाम पर लग-भग पांच हजार बृक्ष काटे जाने है वन विभाग के एक बङे अधिकारी के अनुसार शासकीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन के नाम पर अगले दो महिने में वैध(?) तरीके से एक लाख से ज्यादा पेङ काटे जाने है कंहा है पर्यावरणप्रेमी ?कौन रोकेगा इस विनाश लीला को ! न्यायालय भी इन दिनो इस विनाश लीला को कथित विकास के लिये आवश्यक परिणिति घोषित कर चुका है उन नेता,मंत्री,अधिकारी व कथित समाजसेवियों की फेहरिस्त भी लंबी हो गई है, जिन्होने जंगल कटाई को धंधे के रुप में अपना कर अपने आपको समृद्ध कर खुद को बहरा व अंधा घोषित कर रखा है

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Thursday, May 1, 2008

सरकारी बेबसाइट में आदिवासियों की धर्म संस्कृति का गलत निरुपण:अपराधिक कृत्य

बस्तर के आदिवासी बुद्धिजीवी इन दिनो काफी उद्वेलित हैं, मामला काफी गंभीरहै | लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्रों में अपनी सेवा देने वाले कथित बुद्धिजीवी प्रशासनिक अधिकारी बस्तर कमिश्नर गणेश शंकर मिश्रा ऐसे घृणित सोच रखते होंगे इसमें मुझे संदेह है | आरोप है कि श्री मिश्रा ने बस्तर के आदिवासियों की मौलिक सांस्कृतिक विशेषता "घोटुल" को लेकर अपने विचार प्रदर्शन में आदिवासियों की भावना को ठेस तो पहुंचाया ही, साथ ही घोटुल की गलत ब्याख्या भी की |प्रदेश सरकार की बेबसाइट में घोटुल को विवाह योग्य जोङों की डेटिंग व फ्री सेक्स का केन्द्र बताया जाना निसंदेह प्रदेश सरकार के कथित बुद्धिजीवियों की आदिवासी संस्कृति की समझ की पोल खोलता है | घोटुल को लेकर विश्व भर में भ्रमात्मक अवधारणा ऐसे ही समझदारों ने बनाया है | आदिवासियों के धार्मिक आस्था व सांस्कृतिक गतिविधियों का एक पवित्र केन्द्र होता है| यंहा आदिशक्ति बुढादेव की पूजा होती है | उक्त बेबसाइट में अपमान जनक ढंग से यह भी लिखा है कि आदिवासी नहाने के बाद कपङे नही धोते,तथा जानवरों की तरह पानी पीते हैं| आदिवासियों की सादगीपन व परम्पराओं का खुलेआम मजाक उङाने के खिलाफ बस्तर के जंगल में बिरोध के स्वर गूंजने लगे हैं |

Wednesday, April 30, 2008

bastar samachar: जङ से उजाङे जा रहे जंगल

bastar samachar: जङ से उजाङे जा रहे जंगल

जङ से उजाङे जा रहे जंगल





उपरोक्त सभी चित्र बस्तर के जंगल की दुर्दशा की कहानी बयान कर रही है | यह कहानी घट रही है, कोंडागांव से नारायणपुर होते हुये राजनांदगांव तक जारी सङक चौङी करण के कथित विकास कार्यक्रम के दौरान | सागौन,साल,हरे-भरे व फल लगे आम सहित हजारों इमारती और फलदार बृक्षों की बलि क्या विकास की अनिवार्य परिणिति है ? इन पेङों की कीमत केवल कुछ अरब नही, उससे कंही बढ कर है |

Tuesday, April 22, 2008

निष्पक्षता के भ्रमात्मक आवरण के खिलाफ

जी हां!हम पूरे दावे के साथ स्वीकार करते हैं कि हम निष्पक्ष नही हैं | बल्कि यह कहें कि इस ब्लग की जरूरत भारतीय पत्रकारिता में अचानक घुस आये छद्म निष्पक्षता के नाम पर संवेदन शुन्यता के कारण ही पङा है | पत्रकार मूक-दर्शक बनकर अपने आस-पासघट रहे,समाज और देश को पीछे की ओर ले जाने वाली घटनाओं और शोषण चक्र को केवल परोसने के काम में लगे हुये हैं |

पत्रकारों के लिये किसी कन्या के साथ होने वाला बलात्कार, और किसी आदमी को जलते हुये देखना केवल समाचार बनकर रह गया है | यह पत्रकारिता की चारित्रिक विभीत्सता को प्रदर्शित नही करता तो और क्या है ? आप एक जलते हुये आदमी को केवल इसलिये बचाने की कोशिश नही करते कि उसकी मौत को आकर्षक खबर का सामान बनाकर क्रय-विक्रय के लिये सूचना बाजार में बेच सके !

बहुत दिन हुये छत्तीसगढ के कांकेर में एक अवैध व निर्मम प्रशासनिक कार्यवाही का बिरोध करते हुये मैने एक आई ए एस अफसर का गुस्सा झेला था,तब एक प्रतिष्ठित दैनिक के संपादक ने मुझे सलाह दी थी कि पत्रकार का काम केवल घटनाओं को प्रत्यक्षदर्शी रहकर देखना और पाठक के सामने परोसना है |

आज गंभीरता से विचार करें तो समझ आयेगा कि कई खुबियों के बावजूद पत्रकारिता अपने दायित्वबोध से भटक चुका है | लेकिन संवेदनहीनता का सारा दोष पत्रकारों के सर पर मढना ठीक नही होगा | सच तो यह है कि उपभोक्ता-वादी बाजार ब्यवस्था ने मानव गरिमा और संस्कृति के सारे मुल्य मिटा देने का अभियान चला रखा है , यह सब उसी की परिणति है | उत्तरदायित्य विहीन व इंसानियत बिरोधी पत्रकारिता ने पैर पसार लिया है,जंहा दिखावा ,सत्ता-पक्ष और माफिया की चाटुकारिता और चटकारा युक्त प्रस्तुति के अलावा और कुछ नही |जनता के हित में अपनी सामाजिक भूमिका का निर्वाह न कर पाने की अपनी मजबूरी और नपुंसकता को छिपाने के लिये ही निष्पक्षता के अपने भ्रमात्मक दायित्व का सृजन कर लिया गया है |

सच्चाई यह है कि भारतीय पत्रकारिता का इतिहास कभी भी निष्पक्ष नही रहा है |बल्कि पूर्ण संवेदनशीलता की प्रवित्ति के साथ एक हांथ में झंडा और दुसरे हांथ में कलम थामे भारतीय पत्रकारिता की शुरुवात हुई है |झंडे पर हांथ की पकङ कलम की अपेक्षा ज्यादा मजबूती से दिखाई देता है |साफ शब्दों में कहें कि पत्रकार अपने दायित्व का निर्वहन करने वाला नागरिक पहले होता है,पत्रकार बाद में |

े सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथपत्र के आंकङे


नक्सलियों ने सन् 2007 के दौरान 635 हमले किये हैं जिनमें 242 नागरिकों और 125 सुरक्षा बल के जवानों की मौत हुई है. उन्होंने स्कूल, पुलिस चौकियों, पंचायत भवन, रेलवे सम्पत्ति, बिजली टावर, खदान आदि ढहाए हैं. कहा गया है कि इस एक साल में नक्सलियों ने 55 प्राथमिक स्कूल भवन, 8 पंचायत भवन, 9 शाला आश्रम, 9 हास्टल, 8 आंगनबाड़ी केन्द्र और 18 अन्य भवनों को नष्ट किया है. इनके भय से बस्तर के भयभीत ग्रामीणों ने राहत शिविरों में शरण ले रखी है और इन शिविरों में भी नक्सली हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं. इन परिस्थितियों में नक्सलियों के खिलाफ जनता की ओर से खड़ा किया गया सलवा जुड़ूम अभियान जबरिया रोकना सरकार के लिए संभव नहीं है.
शपथ पत्र में कहा गया है कि सरकार ने बस्तर में 3400 विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति की है, जिसका पुलिस एक्ट में प्रावधान है. ये एसपीओ नक्सलियों के आतंक को रोकने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं.असाधारण परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर की तरह यहां भी एसपीओ कारगर हैं. सरकार ने कहा है कि कहीं-कहीं यह संयोग है कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ने वाले एसपीओ में से कुछ सलवा जुड़ूम के सदस्य हैं.

Tuesday, April 15, 2008


बस्तर के अंदुरनी छेत्रों के गाँवो मे ऐसा ही नजारा देखने को मिलेगा यंहा पहले स्कूल लगता था